Priya Gupta

Inspirational

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Priya Gupta

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अन्धविश्वास

अन्धविश्वास

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रमा एक सीधी सादी गृहणी थी,सावन की धूम चारों और दिखाई दे रही थी। आज सावन का पहला सोमवार था। रमा खूब करीने से मंदिर को धो-पोंछकर मूर्ति सजा रही थी। शिवलिंग पर फूल-माला चढ़ा ही रही थी कि अचानक उसकी बेटी वहां आई और पूछ बैठी- ”मम्मी, हम पूजा क्यों करते हैं ?” अपनी बेटी के इस जिज्ञासु प्रश्न का हँसते हुए रमा ने जवाब दिया- ”बेटी, हम भगवान की कृपा पाने के लिए और अपनी भावना को प्रदर्शित करने के लिए पूजा करते हैं।”

”लेकिन भगवान हैं कहाँ मम्मी ?” 

”यहाँ इस मूर्ति में।” 

अचानक बात करते-करते रमा का संतुलन बिगड़ा और भगवान की मूर्ति टूट गयी।

”अरे ! ये क्या हो गया ? अब तो ईश्वर का कोप सहना पडेगा।” 

मूर्ति के समक्ष हाथ जोड़कर रमा गिड़गिड़ाने लगी- ”हे भगवान ! गलती से ऐसा हो गया। हमसे भूल हो गई, क्षमा करना प्रभु।” 

”मम्मी ! इसमें घबराने की क्या बात है ? पत्थर की मूर्ति ही तो थी टूट गयी। बाजार से नई खरीद लेना।”

 ”अरे नहीं बेटी! जरुर कुछ अशुभ घटित हुआ है। लगता है भगवान जी हमसे नाराज हो गए हैं।” 

ट्रिनट्रिनट्रिनबेटी ने फोन उठाया और चीख पड़ी- ”मम्मी, पापा का एक्सीडेंट हो गया है। वे अस्पताल में भर्ती हैं। जल्दी से चलो।”

”मैंने कहा था न कि कुछ अशुभ घटित होने वाला है। ऐसा करो, तुम अपनी स्कूटी से अस्पताल निकलो और मैं मंदिर होकर आती हूँ। भगवान का कोप है, मंदिर में प्रसाद चढ़ा दूँ। पंडित को दान देकर भिखारी को भी खाना दे दूं ताकि तेरे पापा जल्दी से ठीक हो जाएं।”

”मम्मी, तुम भी किस अंधविश्वास में पड़ी हो। यह कोई कोप नहीं है। पापा को इस स्थिति में हमारी जरुरत है। तुम भी मेरे साथ चलो।”

”नहीं बेटी, तुम अभी यह चीजें नहीं समझोगी। तुम चलो, मैं भी मंदिर से सीधे वहीं पहुँचती हूँ।”

बेटी अस्पताल पहुँची तो डाक्टर ने बताया कि काफी खून बह गया है। तुरंत ’बी पॉजिटिव’ ब्लड की जरूत है। उसे याद आया कि मम्मी का भी बी पाजिटिव ब्लड है। पर मम्मी फोन उठाए तो सही। 

 इधर बेटी ब्लड बैंक का नंबर ढूंढ़कर ’बी पॉजिटिव’ ब्लड की माँग कर रही थी और उधर रमा अंधविश्वास में गुम होकर मंदिर के दरवाजे पर भिखारियों को खाना खिलाने में जुटी थी !


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