STORYMIRROR

Laxman Das

Inspirational

4  

Laxman Das

Inspirational

वतन के लिए

वतन के लिए

1 min
318

सोचा नहीं तो सोचो चमन के लिए 

जिया नहीं तो जियो वतन के लिए।

आंधियां चलें या चलें हो तुफां,

धरती हिले या हिले आसमां।


रात हो या दिन सुबह हो या शाम,

घर हो या धाम आराम हो या काम।

किया नहीं तो करो ये मन के लिए 

जिया नहीं तो जियो वतन के लिए।


तलवार के धार पर मरण के कगार पर,

सात समंदर पार पर कथा के शार पर।

चला नहीं तो चलो अब जतन के लिए 

जिया नहीं तो जियो वतन के लिए।


मौज और ममस्ती में कागज़ की कश्ती में,

महंगी और सस्ती में खुदा की बस्ती में।

चला नहीं तो चलो अब रटन के लिए 

जिया नहीं तो जियो वतन के लिए।


राधा मोहन का प्रेम सुदामा कॄष्ण का क्षेम,

मीरा दिवानी की चाह गरीबों की आह।

गरल पी सको तो पियो भजन के लिए 

जिया नहीं तो जियो वतन के लिए।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Inspirational