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Ritika Khandelwal

Abstract

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Ritika Khandelwal

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वो दिन

वो दिन

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वो दिन,

वो मुस्कुराते से दिन,

वो सुनहरे सपनों के से दिन!

क्या याद है तुम्हें

वो दिन??


जो खट्टी मीठी,

यादों से भरे हुए हैं

वो दिन


वह एक दिन,

जब हम आंखों में आंसू लिए और नाक से सिकोड़े,

अपनी एक नई दुनिया में जाने वाले थे!!

क्या याद है तुम्हें, वो दिन???


वो,एक दिन

जब हमें हमारी सारी मुश्किलों का जवाब मिला!

और वो जवाब था हमारा बेस्ट फ्रेंड!!

क्या याद है तुम्हें ,वो बेस्ट फ्रेंड???


एक दिन

सब, हमें हमारा

वो, एक मनपसंद टीचर मिल जाता है!

जिसे हम हमारी सारी तकलीफे बता देते हैं!!

क्या याद है तुम्हें,

वो, टीचर???


एक दिन

जब, हमें हमारा

वो, एक टीचर मिलता है जो हमें कभी

पसंद ही नहीं आता है!!

क्या याद है तुम्हें,

वो, टीचर भी????


एक दिन

जब हमारा एक निश्चित समय हुआ करता था!

जिस समय पर हम सब मिलकर अपना अपना टिफिन खोलकर एक दूसरे के टिफिन पर झपटा करते थे!!

क्या याद है तुम्हें,

 वो लंच ब्रेक??


उस ,एक दिन को,

जो हम सब बदलना चाहते हैं!

हमारी फेयरवेल का दिन,

जब सबकी आंखें फिर से नाम पड़ जाती हैं ,

और यह सारी यादें, हमारे सामने फिर से आ जाती है!!

क्या याद है तुम्हें,

वो फेयरवेल का दिन??


वो मुस्कुराते से दिन,

वो सुनहरे सपनों के से दिन

क्या याद है तुम्हें,

वो स्कूल के दिन ???



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