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Ritika Khandelwal

Others

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Ritika Khandelwal

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अनोखा रिश्ता

अनोखा रिश्ता

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देखते ही देखते 

क्या हो गया? 

जो राखी तेरी कलाई पे 

खुद बाँधा करती थी

आज उसी राखी को  

कूरियर करना पड़ता है! 


देखते ही देखते

न जाने वो दिन 

कहाँ खो गए ?

जब हम दोनों एक ही

खिलौने के पीछे लड़ा करते थे।

न जाने वो दिन कहाँ चले गये।

जब एक ही मैगी

को दोनों मिल बांटकर

खाया करते थे।

आज न तो वो मैगी रही

ना ही वो दिन।! 


देखते ही देखते 

न जाने हम दोनों इतने बड़े 

कब हो गए?? 

कि पता ही नहीं चला

जो कदम एक दूसरे के साथ 

स्कूल के लिये बढ़ाया करते थे।

आज वो ही कदम 

अपने अपने परिवार की

जिम्मेदारी के लिए बढ़ते हैं।


पर चाहे हम कितने भी बड़े

क्यों न हो जाये? 

तू मेरा वो नालायक भाई

ही रहेगा!!

और मैं वो तेरी प्यारी और

भोली सी बहन ही रहूँगी!!

और हर रक्षाबंधन पे

तुझे ये याद दिलाती रहूँगी !!

कि मेरा गिफ्ट देना मत भूलना !!!

              


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