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Kavita Kaushik

Abstract

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Kavita Kaushik

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वक्त

वक्त

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तेरा वक्त तेरे जुनून को दगा देगा

बुरे वक्त को पास बिठा देगा


कितने ही फासलों से तू गुजरेगा

 पैतरा तुझ पर ही आजमाएगा


वक्त पलके बिछाए खड़ा रहेगा

ना जाने वह तेरे सामने से कब गुजरेगा


जिंदगी ने एक दिन दम तोड़ जाना है

और हर शख्स को अकेले छोड़ जाना है! 

   


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