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Akash Vishwakarma

Romance

4  

Akash Vishwakarma

Romance

उलझन

उलझन

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जी ही जी में जली होगी,

वो रात कैसे ढली होगी।


तेरा छत, तेरा मकान, तेरी गली होगी,

वो चाँदनी कितनी मनचली होगी।


पहन लिबास उजली किरण का,

चाँद सितारे संग चली होगी।


जली जली में मचली होगी,

वो रात कैसे ढली होगी।


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