STORYMIRROR

Snehal Gapchup

Abstract

3  

Snehal Gapchup

Abstract

तुम ही तुम हो

तुम ही तुम हो

1 min
21

सिवा हमारे हर किसीको दिखते हो,हर कोई सून सके तुम्हे।

रुह तक पोहाचती उस् अवाजसे हम तो पिघल चुके होते कब के।


घुस्सा भी तुमसे, शिकायत भी तूमसे। इबादत सिर्फ तुम्हीसे।

कुच भी बिनामांगे सबकुच मिलाहे तूम्हीसे।


पास तो ना कभी आये तुम,दूर भी ना कभी हूवे

सोचे तो तुम्हीं तुम हो, धुंडे तो कही गुम हो।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract