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AMAN SINHA

Romance Tragedy Classics

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AMAN SINHA

Romance Tragedy Classics

तलाश

तलाश

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खुद से रूबरू होने की सूरत तो बने

कभी दिल मैं भी खोल सकूं महूरत तो बने

भरा है लावा दिल मे इतना, पिघल जाऊँ मैं

कभी फट के निकल जाऊँ ऐसी नौबत तो बने


है यूंं तो कई बात जो है सुनानी तुमको

नज़रों से तेरे गिर कर नहीं रहना मुझको

कैसे लौटा के ले आऊँ अपने पास तुझे

पहले सा वही जज़्बात फिर जगाना है मुझे


तेरी हर जिल्लत है मंजूर मुझे

दिये है जो भी इल्ज़ाम सब है कुबूल मुझे

तुझे खो देने का डर ही काफी है

बिना तेरे जीना नहीं मंजूर मुझे


तुझे पता है मैं नहीं मेरा गुरूर बोलता है

जो मूझपर है चढ़ा मेरा शुरुर बोलता है

नहीं मुझे पता कितनी दफा मैंने तुझे तोड़ा है

नहीं परवाह तेरी होके मगरूर सरफिरा बोलता है


मुझे मालूम नहीं के मैं क्या बोल गया ?

अंजाने में ही मैं दिल ये तेरा तोड़ गया

न जाने क्यों इतनी कड़वाहट है मेरे अंदर

जब मूंह खोला कोई जहर घोल गया


बड़े सुकून से बैठा था मैं खुद को समेटे हुए

न जाने तेरे आने क्यूँ हलचल सी हो गयी

चैन जितनी भी थी दिल के गलियारी मे मेरी

तेरी आहट जो मिली जाने कहां सब खो गयी।


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