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Priyanka Bhutada

Abstract

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Priyanka Bhutada

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सूरज नहीं तो दीप बन

सूरज नहीं तो दीप बन

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सूरज नहीं तो दीप बन, तम को मिटाकर आगे बढ़ो।

 बनकर वतन फौजी सदा, सन्मार्ग का पथ तुम गढ़ो।।


अब शत्रु से भारत घिरा,शर से अदू को भेदना।

जयघोष को नारा लगे, मिटती वतन की वेदना।।


सूरज नहीं तो दीप बन,पर देश को रोशन करो।

जो पथ भटकते नागरिक, उम्मीद की किरणें भरो।।


उंगली पकड़कर तुम चलो, तुम राष्ट्र के अब ढाल हो।

जो दृग उठाकर देखता, उनके सदा तुम काल हो।।


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