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Mumtaz Hassan

Abstract

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Mumtaz Hassan

Abstract

समय

समय

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मुझे इंतज़ार है 

उस पल का जब /बेलगाम

भागते समय में

आदमी पकड़ेगा सम्वेदनाओं 

की डोर को


उम्मीद के स्वप्न जीवित हो उठेंगे

मानवता कराहती न 

रहेगी किसी कूड़ेदान में

या

किसी की आत्मा यूँ भटकती 

न रहेगी कहीं सड़कों पर,


रेल की पटरियों पर 

या लावारिस मौतों के घटना स्थल

पर मुझे इंतज़ार है उस पल का

जब एक भी आदमी नहीं मरेगा

संवेदनहीनता से।


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