STORYMIRROR

Dr. Akansha Rupa chachra

Abstract

3  

Dr. Akansha Rupa chachra

Abstract

स्मृतियो की गुल्लक

स्मृतियो की गुल्लक

1 min
178

गुजरे हुए पलो को संजोने लगे।

आज अतीत की यादो मे खोने लगे।

रिश्तो की चादर झीनी सी लगने लगी।

हम भावनाओ मे बहने लगे।।

अल्हड़पन की मस्ती , रूठना मनाना।

गुड़िया की शादी मे आँसू बहाना ।

मीठी यादो का पिटारा दिल मे मिठास

घोलने लगा।।

आज मेरा मन बावरा बन अतीत मे

डोलने लगा।

गाँव की गलियाँ, आम की डाली

नीम के पेड़ो पर झूला जो झूले

बचपन की चाहत को कैसे भूले।।

वो गुजरा जमाना , कभी न भूलाना।।

गुजरे पलो को अंतर्मन मे समाना।

स्मृतियो की दस्तक की खुशबू

से महके तन मन

वो गुजरा जमाना।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract