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सीधी बात

सीधी बात

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बात सीधी थी पर एक बार

भाषा के चक्कर में

जरा टेढ़ी फँस गई।

उसे पाने की कोशिश में

भाषा को उलटा पलटा

तोड़ा मरोड़ा

घुमाया फिराया

कि बात या तो बने

या फिर भाषा से बाहर आए-

लेकिन इससे भाषा के साथ साथ

बात और भी पेचीदा होती चली गई।


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