श्री राम का क्रोध
श्री राम का क्रोध
मैंने उनके चित्त को सदा देखा शांत,
आज न जाने क्यों वो दिखे मुझे अशांत।
पिछले तीन दिवस समुद्र के आगे विनम्र बैठे हैं,
कौन कहेगा ये तीन लोक के स्वामी बैठे हैं।
मां सीता को लाने के लिए ,लंका की ओर जाने के लिए
समुद्र पर अर्जी लगाए हैं ,ये तीन लोक के स्वामी है
जो समुद्र के आगे बैठे हैं।
समुद्र न जाने किस अहंकार में था,
श्री राम को समुद्र पार कराने को तैयार न था।
तीन दिन के सब्र बांध को अब तोड़ना था,
श्री राम को प्रार्थना अब छोड़ना था।
ललकार किया तब श्री राम ने धनुष बाण मंगाया था
ब्रह्मास्त्र चढ़ा, खींच प्रत्यंचा समुद्र की ओर घुमाया था
सदा शीतल रहने वाले राम ने आज विक्राल रूप दिखलाया था।
अपनी ध्वनि से गर्जन कर समुद्र को उन्होंने ललकारा था
अगले ही पल समुद्र श्री राम के चरणों में गिरा था।
रोते समुद्र ने तब लंका जाने का एक सटीक उपाय बताया
नल नील के कौशल की कथा से सबको अवगत कराया।
समुद्र को फिर श्री राम ने क्षमा दान दे दिया,
लंका पर चढ़ने को सेतु निर्माण शुरू किया।
इस तरह भगवान श्री राम के विक्राल रूप के दर्शन से समुद्र कांप गया था।
