STORYMIRROR

vansh kumar

Inspirational

4  

vansh kumar

Inspirational

श्री कृष्णा कलयुग संवाद

श्री कृष्णा कलयुग संवाद

1 min
386

उठो पार्थ इस स्वप्न से 

आलस का संघार करो 

तोड़ो इन भ्रम की बेड़ियों को 

स्वयं पर यह उपकार करो।


त्याग करो इस भय का 

इस चुनौती को तुम स्वीकार करो 

अनुनय विन्नय नही सुनती 

है यह कलयुग की माया 

जिसने त्यागी यह चुनौती

वह आगे न बढ़ पाया।


उतार चढ़ाव

का समाहार है 

यह जीवन मानव का 

सरल हो 

अगर मिल जाता सबकुछ 

हो न जाता वो दानव सा।


जीवन कर्मयुद्ध है 

इस परम सत्य को स्वीकार करो 

कई अर्जुन 

कई एकलभ्ययों 

जन्म लिए 

और मिल गए 


धरा की माटी को 

चंद देखते रहे 

कर्ण की भांति वो 

जीवन ये युद्ध हैं तेरा

अब तू शास्त्रों को धारण कर 

कोई न आएगा

सहायता को तेरी 


इस सत्य को अब तू

स्वीकार कर 

छोड़ इस आलस हो 

तू अपनी बाधाओं से लड़।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Inspirational