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Govardhan Bisen 'Gokul'

Abstract Inspirational

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Govardhan Bisen 'Gokul'

Abstract Inspirational

श्रद्धा से तर्पण करें

श्रद्धा से तर्पण करें

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(कुंडलिया छंद)


ऋण सारा है शीश पर, जानत सकल जहान।

श्रद्धा से तर्पण करें, पावन मुक्ति-विधान॥

पावन मुक्ति-विधान, तृप्ति पावें सब पूर्वज।

बहाई अमृत धार, मिटें कुल के सब दुरभज॥

कह 'गोकुल' कविराय, खुला सुख का शुचि द्वारा।

मेटें तीनों ताप, उतर जाए ऋण सारा॥१॥


तर्पण तिल-जल से करें, कुशा हाथ धरि लेव।

पंचयज्ञ का भोग दै, तृप्त होत पितृ देव॥

तृप्त होत पितृ देव, श्वान गौ काक जिवाएँ।

दीन-विप्र घर आनि, मोद सों अन्न खवाएँ॥

कह 'गोकुल' कविराय, करहु मन से शुचि अर्पण।

तजि तामस सब भाव, करै पितरन को तर्पण॥२॥


पूर्वज प्यारे कुल-धनी, तिनकी पावन देन।

संस्कार हमे है मिले, पाये सुख अरु चैन॥

पाये सुख अरु चैन, दया सब जीवन धारें।

तजि मिथ्या अभिमान, सादगी अंतर सारें॥

कह 'गोकुल' कविराय, धरम-मर्यादा धारे।

सीख दया की देहि, सदा ही पूर्वज प्यारे॥३॥


डॉ. गोवर्धन बिसेन 'गोकुल'

गोंदिया (महाराष्ट्र)

दि. २७ सितंबर २०२६


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