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Sudhirkumarpannalal Pratibha

Inspirational

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Sudhirkumarpannalal Pratibha

Inspirational

शक

शक

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जब शक

मन में

बैठ जाए तो

निकले न

निकलती है

बल्कि

शक की

कड़ी

लंबी होते

जाती है

मोटी होती

जाती है

अटूट होती

जाती है

मजबूत होती

जाती है

शक बिना

सिर पैर का

होता है

यह परेशान

किए रहता हैं

इसका कोई

इलाज नहीं हैं

यह लाइलाज है

इसकी कोई भी

दवा नहीं है

अगर है तो वो

एकमात्र दवा 

विश्वास ही है.



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