STORYMIRROR

UMA PATIL

Abstract

3  

UMA PATIL

Abstract

सांसें...

सांसें...

1 min
164

रहो तुम 


मेरे साथ 


हमेशा...


लेके हाथों में 


हाथ...


 


हम चलेंगे 


इस दुनिया में...


हर बस्तीं में...


मनायेंगे


हम मौज


हर त्योहार में...


हो दिवाली 


या फिर होली...


 


ये हाथ नहीं 


छूटेगा कभीं...


ये साथ हमारा


नहीं छूटेगा कभीं...


हो पतझड़


या फिर हो सावन...


हम रहेंगे 


एक-दूसरे के साथ


सातों जनम...


 


तुम मेरे हमसफर...


मेरे हमराही...


चाहे हो परबत 


चाहे हो खाई...


 


हम निडर होकर


लढेंगे इस जमाने से...


जब तक हमारी


चल रहीं हैं सांसें...


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract