Shri om sharma
Classics
शफकत जानकार
निस्बत की थी जिससे।
मुखतलिफ होते वक्त
वो शख्स मेरे इन्तहाई
अहल की जमानत
भी न बचा सका।
रुखसत
अपना अपना प्य...
विपरीत की संगति में ही संगीत है इसलिए सब शुभ है सब कल्याणकारी है। विपरीत की संगति में ही संगीत है इसलिए सब शुभ है सब कल्याणकारी है।
जब होंगे अपने साथ वह भयानक रात भी दिवाली होगी..........। जब होंगे अपने साथ वह भयानक रात भी दिवाली होगी..........।
तभी तो कहता कवि कोई, धन्य है, तू धन्य है, कोटि - कोटि, तुझे नमन है। तभी तो कहता कवि कोई, धन्य है, तू धन्य है, कोटि - कोटि, तुझे नमन है।
घट-घट बोल रहा था अंतर्मन का विराट्-रूप सत्यता सुंदरता मे़ं। घट-घट बोल रहा था अंतर्मन का विराट्-रूप सत्यता सुंदरता मे़ं।
जाने क्यों यह भूल गई मैं जब होता है दिया तले अंधेरा.................. जाने क्यों यह भूल गई मैं जब होता है दिया तले अंधेरा..................
तो अधूरे कर्मों की पहचान है कर्म करते चलो ..जीने की राह का यही संकेत है …। तो अधूरे कर्मों की पहचान है कर्म करते चलो ..जीने की राह का यही संकेत है …।
प्रेम और स्नेह की बहार हो, वो मेरा प्यार हो। प्रेम और स्नेह की बहार हो, वो मेरा प्यार हो।
इस ख्वाहिश के साथ जीना होता है, जो कभी पूरी नहीं हो पाती है। इस ख्वाहिश के साथ जीना होता है, जो कभी पूरी नहीं हो पाती है।
जीवन की अमूर्त सत्यता, आत्मा की अद्वितीय विशेषता। जीवन की अमूर्त सत्यता, आत्मा की अद्वितीय विशेषता।
ये कैसी उलझी हुई अजीब है मेरी रियलिटी, इसे प्यार कहूं या फॉर्मेलिटी ये कैसी उलझी हुई अजीब है मेरी रियलिटी, इसे प्यार कहूं या फॉर्मेलिटी
हर जन्म, शायद खिच लाएगी बार - बार l मां तुम्हारी याद आएगी बार-बार। हर जन्म, शायद खिच लाएगी बार - बार l मां तुम्हारी याद आएगी बार-बार।
जीवन बड़ा अनमोल है सबका इसको यूं ना बर्बाद करो.. जीवन बड़ा अनमोल है सबका इसको यूं ना बर्बाद करो..
मंगल हो सबका, सबकी हर मंगलकामना पूरी हो जाए। मंगल हो सबका, सबकी हर मंगलकामना पूरी हो जाए।
जिस पैसे को उम्र भर कमाता रहा आज वही पैसा राख में ढेर हो गया। जिस पैसे को उम्र भर कमाता रहा आज वही पैसा राख में ढेर हो गया।
जिन्दा दोनों को दीवार पर निष्ठुरो ने चिनवा दिया दो अबोध बालकों ने धर्म के खातिर प्राण जिन्दा दोनों को दीवार पर निष्ठुरो ने चिनवा दिया दो अबोध बालकों ने धर्म के खात...
होंगे बेदखल अब वो इतिहास से हमारे, मिटाया जिन्होंने इतिहास को हमारे ! होंगे बेदखल अब वो इतिहास से हमारे, मिटाया जिन्होंने इतिहास को हमारे !
प्रणाम मातु अम्बिके प्रणाम कोटिशः तुम्हे।। प्रणाम मातु अम्बिके प्रणाम कोटिशः तुम्हे।।
कुछ इस अद्भुत अंदाज़ में ज़िन्दगी उसके द्वारे मुस्काएगी और लहलहायेगी।। कुछ इस अद्भुत अंदाज़ में ज़िन्दगी उसके द्वारे मुस्काएगी और लहलहायेगी।।
यूँ ही प्रेम सागर में वास करती ही रहती। काश मैं छोटी ही रहती। यूँ ही प्रेम सागर में वास करती ही रहती। काश मैं छोटी ही रहती।