Shri om sharma
Classics
शफकत जानकार
निस्बत की थी जिससे।
मुखतलिफ होते वक्त
वो शख्स मेरे इन्तहाई
अहल की जमानत
भी न बचा सका।
रुखसत
अपना अपना प्य...
तुम आयी तो ज़िन्दगी महकी, वर्ना बेज़ार थी। तुम आयी तो ज़िन्दगी महकी, वर्ना बेज़ार थी।
काश ! कोई समझ पाता बिखरने के बाद का हाल। काश ! कोई समझ पाता बिखरने के बाद का हाल।
एहसास एक है जज़्बात एक है बस यही संदेश उस तक। एहसास एक है जज़्बात एक है बस यही संदेश उस तक।
कभी किसी दिन का एक आम लड़का कर जाता काम किसी और दिन बड़े-बड़े. कभी किसी दिन का एक आम लड़का कर जाता काम किसी और दिन बड़े-बड़े.
तेरा दर दूर नहीं, मन का मौजी मौन। हीय में झांक देखिए, देख बसा है कौन।। तेरा दर दूर नहीं, मन का मौजी मौन। हीय में झांक देखिए, देख बसा है कौन।।
इन सबको मिलकर बनाती, आज का भारत। इन सबको मिलकर बनाती, आज का भारत।
हर प्राणी के मन में हरदम वास करे अब, ज्ञान की सच्ची सी भाषा ! हर प्राणी के मन में हरदम वास करे अब, ज्ञान की सच्ची सी भाषा !
हरेे पत्ते देगा, शुद्ध हवा देगा, सबका सच्चा दोस्त बनेगा। हरेे पत्ते देगा, शुद्ध हवा देगा, सबका सच्चा दोस्त बनेगा।
शांत रहकर इंसान को, कर्म करने चाहिए, हर जन को साथ लेके, खूब ही हँसाइये।। शांत रहकर इंसान को, कर्म करने चाहिए, हर जन को साथ लेके, खूब ही हँसाइये।।
एक निस्वार्थ दोस्त की तरह, आपका साथ देेगा। एक निस्वार्थ दोस्त की तरह, आपका साथ देेगा।
करना अपने सपनों को साकार यही ताने मारने वाले एक दिन करेगे तुम्हारा सतकार। करना अपने सपनों को साकार यही ताने मारने वाले एक दिन करेगे तुम्हारा सतकार।
अपने सारे काम निवृत्त,निद्रा आती है, पूरी रात आराम से निद्रा में सो जाता हूं। अपने सारे काम निवृत्त,निद्रा आती है, पूरी रात आराम से निद्रा में सो जाता हूं।
जिससे आशा मदद की, वो ही मोड़ लेते हैं मुख। जिससे आशा मदद की, वो ही मोड़ लेते हैं मुख।
गुरु नानक की सीख सिखाते बन गए वो दार्शनिक और एक रणवीर ! गुरु नानक की सीख सिखाते बन गए वो दार्शनिक और एक रणवीर !
जीने की खातिर "शकुन", मैं ग़मों के साये अक्सर वार देता हूँ। जीने की खातिर "शकुन", मैं ग़मों के साये अक्सर वार देता हूँ।
मतंग मुनि की वाणी पर था शबरी को विश्वास। मतंग मुनि की वाणी पर था शबरी को विश्वास।
जो कभी खास थे वो यार ही 'राना' मेरे। मुफ़लिसी के आते ही वो हाथ उठा देते हैं।। जो कभी खास थे वो यार ही 'राना' मेरे। मुफ़लिसी के आते ही वो हाथ उठा देते हैं।।
बच्चे कचरा सब खोज रहे अपनी क़िस्मत कोस रहे। बच्चे कचरा सब खोज रहे अपनी क़िस्मत कोस रहे।
बाल उपर की ओर, अनुशासन से ओत प्रोत। बाल उपर की ओर, अनुशासन से ओत प्रोत।
उन्हें कैसे बताये कि, कभी हम भी प्रेमी थे, कभी हम भी आशिक़ थे ! उन्हें कैसे बताये कि, कभी हम भी प्रेमी थे, कभी हम भी आशिक़ थे !