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Sudhir Srivastava

Abstract

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Sudhir Srivastava

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राहत

राहत

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बेटी विदा हो

अपने घर गई

राहत मिला।


औपचारिकता

बाढ़ की विभीषिका

राहत कार्य।


बेटी तो है न

फिर क्यों करें शोक

नाम चलेगा।


दाह संस्कार

बेटी करेगी तो भी

मोक्ष मिलेगा।


सेवानिवृत्त

होकर घर आया

अब राहत।


भरोसा रखो

खुद पर अपने

राहत पाओ।


कौन जानता

कल तक क्या होगा

आज राहत।


मंत्री के घर

गरीबों का राहत

बंटता कैसे।


राहत पाओ

मंत्री से तुम सब

गुलामी करो।


बेटे बहू तो

अपने में मस्त हैं

हमें राहत।


अपनी चिंता

आप खुद कीजिए

राहत पायें।


राहत पाना

राहत के लिए भी

राहत ही है।


बेटी का बाप

राहतें अहसास

न गमे साथ।


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