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Wachaspati Pandey

Abstract

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Wachaspati Pandey

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पुरानी यादें …

पुरानी यादें …

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मेरी रूह के दरीचों से पुरानी यादें आ दिल पर दस्तक देती हैं

दिल में लेकिन एक आर्द्रता है, हर परत में ग़म का एक क़तरा है

वक़्त हर घाव का मरहम है, पर यहाँ तो मेरा हर घाव बेरहम है 


जाने दो जिसको जाना है,किसी का आना-जाना अब बेगाना है 

संजोए थे एहसास, अब उनके बस बुझने का है बोझिल क़यास

मुस्कान आ बस जाती थी, अब वो कहीं और शिरकत करती है


उमंग बेरंग हो चली, उन्माद को अवसाद आच्छादित किए हुए है 

वैचारिक मंथन, पलों को पालना, और फिर बस मृग-मरीचिका  

प्रेम दे, प्रेम पा लेना सहज नहीं, आज हमने तृष्णा को समझा है।


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