ज़िंदगी
ज़िंदगी
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ज़िंदगी में अवसाद है, तपिश है, आंसू हैं तो ख़ुशियाँ भी हैं
अल्फ़ाज़ों में ना सिमट पाएं, ऐसे गहरे बहुत जज़्बात भी हैं
सितारों की कशिश में कुछ पल बेबस, बेबसी के भी हैं
जुनून अगर जिगर में है, तो नशा मंज़िल पा लेने में है!
पर सोचता हूँ, सफ़र-ए-ज़िंदगी में कुछ पड़ाव सूने भी हैं
आती है हर सुबह, कभी ख़ुशी तो कहीं रंजों-ग़म भी है
हसीन लमहें हो तो उठ कर बेझिझक समेट लो तुम.
आज उगता खिलता सूरज है, तो कल गहन बारिश भी है!
