STORYMIRROR

sandhya kashyap

Abstract Inspirational

3  

sandhya kashyap

Abstract Inspirational

प्रतिदर्पण

प्रतिदर्पण

1 min
261

महिषासुर के पापों ने जब हाहाकार मचायी 

हाथ जोड़ तीनों लोकों ने बस एक गुहार लगायी 

शेर पर सवार देवी चली करने अगुवाई

विनाश कर उस पाखंडी का बली भैंसे की चढ़ायी 


अघ्याती का घात करे वो 

धर्म पथ दर्शाये 

विनाश कर उस दुरगम का 

वो खुद दुर्गा कहलाये 


पत्नी भी वो माता भी है 

समस्त ब्रह्माण्ड की दाता

महाकाली वो गौरी भी वो 

है जगदम्बा माता


हर नारी के दर्पण में 

निहित है आठ भुजाएँ

अन्धकार का काल मिटा दे 

जब अपनी पे आये 


इसी पक्ष का आधार बन

संपूर्ण जगत के अंतर्मन 

शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा को

है धरती पे आयी 

अज्ञानता का नाश कर

वो आदिशक्ति कहलायी


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract