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मधु मिshra 🍃

Abstract

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मधु मिshra 🍃

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प्रीत का रंग

प्रीत का रंग

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ब्रज गलियन से कान्हा का

मेरे अतिशय है अनुराग..!

धूम मचाय रहे हैं कान्हा...

ब्रज की रज में फाग..!

कान्हा संग चली मेरी राधे...

खेलन को रंग गुलाल..!

प्रीत के रंग में रंग गई

जैसे हो सुर्ख चटक रंग लाल !



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