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Sudhirkumarpannalal Pratibha

Abstract Inspirational Thriller

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Sudhirkumarpannalal Pratibha

Abstract Inspirational Thriller

प्रेम सर्वस्व है

प्रेम सर्वस्व है

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10

प्रेम

हारना

नहीं

जानता

परिस्थिति

अगर

उल्टा

हो

जाए


सारे

दाव

उल्टे

पड़ 

जाए

तो

हार

जाता

है

लेकिन

उस

हार

में

अपना

जीत

देखता

है


प्रेम

लचीला

होता

है

प्रेम

तटस्थ

नहीं

होता

है


प्रेम

भाव

में

निहित

होता

है

प्रेम

सुंदरता

और

यौवन

में

प्रेम

नहीं

वो

तो 

आकर्षण

होता

है


प्रेम

एक

कल्पना

से

परे

शब्द

से

परे

अहसास

है


सुखद

अनुभूति

है

रोमछिद्र

के

भीतर

होता

है

प्रेम

आत्मा

के

भीतर

होता

है


प्रेम

सांसों

के

भीतर

होता

है

प्रेम

धड़कन

के

भीतर

होता

हैं


प्रेम

मन

के

भीतर

होता

है

प्रेम

नजरों

के

भीतर

होता

है


प्रेम

डर

के

भीतर

होता

है

प्रेम

तड़प

के

भीतर

होता

है


प्रेम

आंसू

के

भीतर

होता

है

प्रेम

दर्द

के

भीतर

होता

है

प्रेम

सुकून

के

भीतर

होता

है


प्रेम

दिन

पर

दिन

प्रबल

होते

जाता

है

प्रेम

मजबूत

हो

जाता

है


प्रेम

प्रेम

का

कोई

काट

नहीं

बल्कि

इसके

परे

अकाट्य

होता

है

प्रेम

प्रेम

अजर

हो

जाता

है


प्रेम

अमर

हो

जाता

है

प्रेम

हार

में

जीत

ढूंढता

है

प्रेम

असफलता

में

सफलता

ढूंढता

है


प्रेम

अपरिभाषित

है

प्रेम

अतुलनीय

है

प्रेम

कल्पना

से

परे

अकल्पनीय

है

प्रेम

हीरा

की

तरह

कठोर

है


प्रेम

फूल

की

तरह

कोमल

होता

है

प्रेम

भूलकर

भी

भूल

नहीं

करता

प्रेम

मोती

है


सोना

है

चांदी

है

प्रेम

दिखता

नहीं

प्रेम

बिकता

नहीं

प्रेम

प्रेम

होने

के

भीतर

होता

है

प्रेम

प्रेम

सब

शब्दो

का

सार

है


प्रेम

दिखावा

नहीं

करता

प्रेम

छलावा

नहीं

करता

प्रेम

ईमानदार

होता

है

प्रेम

बईमानी

से

नफरत

करता

है


प्रेम

किसी

का

आदर

करता

है

प्रेम

आता

है

तो

जाता

नहीं

प्रेम

के

पैर

नहीं

होते

प्रेम

अतिथि

नहीं

होता

जहां

रुकता

है


फिर

वहीं

का

हो

जाता

है

प्रेम

अपरिवर्तित

है

प्रेम

विद्वता

के

भीतर

होता

है

अज्ञानता

के

भीतर

होता

है


प्रेम

इश्क

मुहब्बत

प्यार

स्नेह

ममत्व

वात्सल्य

दाम्पत्य

के

भीतर

होता

है

प्रेम

हर

राज

के

भीतर

होता

है

प्रेम

हर

जीव

के

भीतर

होता

है

प्रेम

हर

पेड़

में

हर

पौधे

में

प्रेम

निर्जीव

में

होता

है


प्रेम

प्रेम

अशांति

के

भीतर

शांत

रहता

है

शांत

के

भीतर

अशांत

रहता

है

प्रेम

प्रेम

होता

है

प्रेम

सतही

नहीं

अथाह

गहरा

होता

है


प्रेम

सागर

है

प्रेम

उच्छृंखल

नहीं

गंभीर

होता

है

प्रेम

पता

नहीं

क्या

होता

है

प्रेम

अशांति

के

भीतर

शांति

बंटता

है

प्रेम

सद्भावना

है

प्रेम

भाईचारा

है


प्रेम

कला

है

प्रेम

विज्ञान

है

प्रेम

धर्म

है

प्रेम

कर्म

है

प्रेम

आदि

है

प्रेम

अनादि

है

प्रेम

अंत

है

प्रेम

अनंत

है

प्रेम

शब्द

है

प्रेम

अर्थ

है

प्रेम

शब्दार्थ

है

प्रेम

भाव

है


प्रेम

भावार्थ

है

रिश्ता

नाता

संबंध

के

भीतर

होता

है

प्रेम 

प्रेम

कोयल

की

आवाज

में

प्रेम

शेर

की

दहाड़

में

प्रेम

मोर

के

नाच 

में

इंतजार

और

आश

में

ऋतुओं

में 

रात

में

दिन

में

धूप

में

छांव

में

मान

में 

अपमान

में

अभिमान

में

स्वाभिमान

में

प्रेम

अणु

में

परमाणु

में

जीवाणु

में

विसाणु

में

हर 

पेड़

में

हर

पौधों

में 

संसार

के

हर

कोने

मैं 


सर्वव्यापी

होता

है

ऐसी

कोई

जगह

नहीं

जहां

नहीं

होता

है

प्रेम।


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