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Amit Kumar

Inspirational


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Amit Kumar

Inspirational


पिता

पिता

1 min 201 1 min 201

पिता एक मौन रूपी सम्बल

जो अपनी मुस्कुराहट को छिपाकर

दर्द को अपना हथियार चुनता है

खुद से कभी नही कहता

मुझे यह अपने लिए करना है

पर अपने परिवार की

सारी जिम्मेदारी दूनता है

जो सपने उसके रह गये अधूरे

उन्हें अपने बच्चों में बुनता है

हमेशा तेवर ऊंचे रखता है

कन्धे पर बिठाता है 

घोड़ा बन घुमाता है

पर परिस्थितियों के आगे नही झुकता है

मन पतंग सा है उसका वाचाल

फिर भी बुद्ध सा शांत बन

वो भीतर ही भीतर कुढ़ता है

उसका मौन जिस दिन टूटता है

या तो वो पिता नही रहता

या फिर उसका भरम टूटता है

बच्चों को क्या मालूम पिता होना

उन्होंने तो सिर्फ माँ का दुलार जाना है

पिता की सख़्ती के पीछे

दुनियादारी का संस्कार निराला है

वो एक समर्पित कलाकार है

अपने कर्मक्षेत्र का

बस बच्चों का अभिमान

उनकी वो नन्ही मासूम मुस्कान

बच्चे ही तो होते हैं  

असल मे माता पिता की पहचान।

         


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