पौधरोपण एक पुण्य
पौधरोपण एक पुण्य
आओ लगायें हम-सब,
कुछ सुंदर बाग प्यार के।
एक आम,एक अमरूद,
और लीची,सेब,अनार के।
एक तरफ कुछ फूल होंगे
चंपा,चमेली,गुलबहार के।
दूसरी तरफ कुछ झाड़ी,
बेला,गुलाब व कचनार के।
कुछ लोग उसमें सैर करेंगे,
राहगीर बैठेंगे थकहार के।
चारो ओर खग गुंजन होगा
दादूर,पपपीहा,तीतर मोर के।
बर-पीपल,गुलर छाया देंगे,
तुलसी,नीम,बबूल देंगे दवा।
जब जब डोलेगें उनके पत्ते,
बहेगी फर-फर सुहानी हवा।
जितना यहां पौधरोपण होगा,
उतना स्वच्छ होगा वातावरण।
पर्यावरण ही सब कुछ अपना,
इसपर ही निर्भर जीवन-मरण।
