महिपाल सिंह मोकलसर
Abstract
नेकी कर पर फेसबुक-
व्टासअप पर मत डाल
कोई फिजूल ही हीन औ
र कमतर महसूस करेगा।
हे क्षत्रिय
नेकी
हुआ आश्वस्त, फिर खिलखिलाया सुन परात की बात। हुआ आश्वस्त, फिर खिलखिलाया सुन परात की बात।
क्यों न दो मीठे बोलों से किसी के चेहरे पर मुस्कान लाई जाए। क्यों न दो मीठे बोलों से किसी के चेहरे पर मुस्कान लाई जाए।
मोहन मोहन
प्रेमिका अपना घर बार छोड़ प्रेमी को अपना है लेती। प्रेमिका अपना घर बार छोड़ प्रेमी को अपना है लेती।
तूफानों की तरह जज्बात मोहब्बत में मोहब्बत का पैगाम सुनाया हमने। तूफानों की तरह जज्बात मोहब्बत में मोहब्बत का पैगाम सुनाया हमने।
वैसे तो न जाने रोज लाखों मरते हैं पर कुछ मरकर, भी कभी नहीं मरते। वैसे तो न जाने रोज लाखों मरते हैं पर कुछ मरकर, भी कभी नहीं मरते।
ख्वाहिशों को पंख मिल जाए आसमां मैं यह दिल उड़ जाए। ख्वाहिशों को पंख मिल जाए आसमां मैं यह दिल उड़ जाए।
मेरी उड़ानों पर मुझे नाज है मेरे परों पर भी मुझे विश्वास है। मेरी उड़ानों पर मुझे नाज है मेरे परों पर भी मुझे विश्वास है।
मुझे मेरे हक़ का इनाम चाहिए, फ़रिश्ते भी पढ़े, मुझे वो नाम चाहिए। मुझे मेरे हक़ का इनाम चाहिए, फ़रिश्ते भी पढ़े, मुझे वो नाम चाहिए।
सब कुछ बस न्योछावर करना आसान नहीं होता एक औरत होना। सब कुछ बस न्योछावर करना आसान नहीं होता एक औरत होना।
फिर भी अधरों पर रहती है एक मुस्कान। फिर भी अधरों पर रहती है एक मुस्कान।
जाए दुनिया छोड़ जब, याद करे संसार। जाए दुनिया छोड़ जब, याद करे संसार।
अपनी मुस्कान की खुशबू बिखेरते रहिए जिन्दगी का सफर खुशनुमा बनाते रहिए। अपनी मुस्कान की खुशबू बिखेरते रहिए जिन्दगी का सफर खुशनुमा बनाते रहिए।
फिऱ से राम-राज्य की महक आयेगी गर इंसानों की जनसंख्या तू कम कर दे। फिऱ से राम-राज्य की महक आयेगी गर इंसानों की जनसंख्या तू कम कर दे।
वीरवार को ध्यान जो करता मां से उसको ज्ञान है मिलता। वीरवार को ध्यान जो करता मां से उसको ज्ञान है मिलता।
प्यार के सुनहरे फूल कांटों पर फिर से खिल जाएंगे । प्यार के सुनहरे फूल कांटों पर फिर से खिल जाएंगे ।
जोड़ती है ! अब तो करें हर क्षेत्र में नारी-सम्मान। जोड़ती है ! अब तो करें हर क्षेत्र में नारी-सम्मान।
चला आता हूँ तेरी ओर चुपचाप तू मुझे मुक्त कर दे चुपचाप। चला आता हूँ तेरी ओर चुपचाप तू मुझे मुक्त कर दे चुपचाप।
अपने घर में ही बैठकर जंग को जीतो ना धरती का विनश होनेसे बचाओ ना। अपने घर में ही बैठकर जंग को जीतो ना धरती का विनश होनेसे बचाओ ना।
कभी समझें निर्बल न किसी रिपु को, तब हो पाएगी खत्म कोरोना की कहानी। कभी समझें निर्बल न किसी रिपु को, तब हो पाएगी खत्म कोरोना की कहानी।