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Eshita Maheshwari

Inspirational

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Eshita Maheshwari

Inspirational

नारी परिचय

नारी परिचय

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मैं भारत की बेटी बोल रही हूँ

अंतर मन के चिंतन की सारी गाँठे खोल रही हूँ।


रूढ़िवादी बातों के अंधेरे गर्त मे धसी हुई हूँ,

रंग-रूप और चरित्र के जाल में फसी हुई हूँ।

पितामह की सरसैया पर जितने बाण गड़े हुए है,

मेरी भी तो चुनर पर उतने प्रश्न खड़े हुए है!


एक मर्द की दूसरी मर्द से लड़ाई,

पर सबसे पहले औरत ने गाली खाई!!

मैं राम कि सिया नहीं,मै उसकी आप बीती हूँ,

चौसर मे हारी हुई की साड़ी आज भी सीती हूँ।


कपड़ो को संस्कारो का माप समझा जाने लगा,

एक समय पर बेटी का होना श्राप बताया जाने लगा।

मैं बोझ नही जिम्मेदारी हूँ,

घर-आँगन में ख़ुशियों कि किलकारी हुँ।


लोग पूछते है मुझसे मैं कौन हूँ, मैं क्या हूँ?

मैं क्यों इतनी बेहया हूँ?

सवाल अच्छा है, जवाब सुनाती हुँ,

औरत की तस्वीर नई सी बनाती हूँ।


मैं कली नहीं, काली हूँ,

लक्ष्मी ही नही, खप्पर वाली हूँ,

मैं शंका त्याग दूँ तो स्वयं शंकर हूँ,

तुम जंजीरो में बाँध न पाओगे वो अम्बर हूँ।


मैं कल्पना की उड़ान हूँ,

टेरेसा का आसमान हूँ,

जो मुश्किले चढ़ रही है जिंदगी की,

मैं उस अरुणिमा के हौसले का परवान हूँ।


जो शिखर तक चले, मैं उस बचेंद्री की हिम्मत हूँ,

तानाशाही से जो न दबे, मैं उस anne frank के लिखे खत हूँ।


मैं भारत की कोकिला की आवाज़ हूँ,

आतंक के अंधेरो मे जो अधिकार के लिए लड़ी,

मैं उस मलाला का आगाज़ हूँ।


मत पुछूँ ये कहानी कितनी पुरानी है,

क्योंकि मेरी लड़ाई आज भी जारी है।


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