STORYMIRROR

हरि शंकर गोयल "श्री हरि"

Abstract Classics Children

4  

हरि शंकर गोयल "श्री हरि"

Abstract Classics Children

मुक्तक : दादी की थपकी

मुक्तक : दादी की थपकी

1 min
644

बिना दादी की थपकी के कहां ये नींद आती है 

वो दादी है जो रोजाना , कहानी नई सुनाती है 


कभी करते जो शैतानी तो डरते मम्मी पापा से

मगर दादी हमें अपने पल्लू में चुप से छुपाती है।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract