Rituraj Rituraj
Abstract
कहने को तो लाखों लोग हैं इस शहर में,
फिर भी हर सहर दिल ढूंढता है कोई अपना।
हवा भी वही है, फिजा भी वही है,
फर्क बस इतना है कि कुछ भी नहीं है अपना।
वक्त
मन
वफा में लाजमी था अश्कों का बहना दिन-रात तेरे ख़ातिर। वफा में लाजमी था अश्कों का बहना दिन-रात तेरे ख़ातिर।
होते ऐसे गाँव अलबेले लगते रोज अनोखे मेले। होते ऐसे गाँव अलबेले लगते रोज अनोखे मेले।
समर्थ किया तुमने मुझको चाहे अज्ञान तम की रात हो कर समर्पित प्रियतम तले आँसू बहाता चल। समर्थ किया तुमने मुझको चाहे अज्ञान तम की रात हो कर समर्पित प्रियतम तले आँसू ...
कोरोनो की बाढ़ आई अब तुम खड़ी कर दो कश्तियां, समझाने से भी ना समझे तो तुम उजाड़ दोगे कोरोनो की बाढ़ आई अब तुम खड़ी कर दो कश्तियां, समझाने से भी ना समझे तो त...
गर तुमने खुद को बचा लिया तो मानवता भी होगी आभारी। गर तुमने खुद को बचा लिया तो मानवता भी होगी आभारी।
स्वच्छता लाएं सद् भावना जगाएं खुद को केरोना से बचाएं कोरोना खुद ब खुद सिमट जाएगा स्वच्छता लाएं सद् भावना जगाएं खुद को केरोना से बचाएं कोरोना खुद ब खुद ...
साफ सफाई का रखो तुम ध्यान हाथ मुंह धोकर तुम करो जलपान खाओ शुद्ध साफ भोजन शाकाहारी साफ सफाई का रखो तुम ध्यान हाथ मुंह धोकर तुम करो जलपान खाओ शुद्ध साफ भोजन श...
सहेज और साधारण बना रही है, यह कोरोना भी हमे काफी कुछ सिखा रही है। सहेज और साधारण बना रही है, यह कोरोना भी हमे काफी कुछ सिखा रही है।
कौरव सौ थे,पांडव सिर्फ़ पाँच ही थे, जीत सदा सत्य की होती है असत्य की। कौरव सौ थे,पांडव सिर्फ़ पाँच ही थे, जीत सदा सत्य की होती है असत्य की।
ये 15 अगस्त हर साल होगी और मस्ती का ये आलम भी हर साल होगा। ये 15 अगस्त हर साल होगी और मस्ती का ये आलम भी हर साल होगा।
दिल बैठा जा रहा उनका भरी महफिल जहर पीकर भी जब हमे मुस्कुराता देखा। दिल बैठा जा रहा उनका भरी महफिल जहर पीकर भी जब हमे मुस्कुराता देखा।
मैं तेरा मुरीद ए आज़ादी नहीं चाहिए मुझे मेरी धड़कती साँसे!! हँसते खिलखिलाते मैं तेरा मुरीद ए आज़ादी नहीं चाहिए मुझे मेरी धड़कती साँसे!! हँसते खिल...
सर्द मौसम के बाद सुहावने मौसम की सौगात लाई रे, आई रे आई रे बसंत ऋतु आई रे। सर्द मौसम के बाद सुहावने मौसम की सौगात लाई रे, आई रे आई रे बसंत ऋतु आई रे।
21 दिन 21 दिन
जरा शिथिलता प्रलय ला सकती , और विजय बन सकती अंतिम पल में हार है, सब गुड़-गोबर हो जाएगा जरा शिथिलता प्रलय ला सकती , और विजय बन सकती अंतिम पल में हार है, सब गुड़-गोबर...
जिसे खत्म न होना, बनी रहे आखिरी सांस तक मेरी। जिसे खत्म न होना, बनी रहे आखिरी सांस तक मेरी।
वो है, मेरे बजरंगबली का साखी उनसे ही अपनी सांसों को चलते देखा है। वो है, मेरे बजरंगबली का साखी उनसे ही अपनी सांसों को चलते देखा है।
विजय हमारी निश्चित होगी कोरोना को मिलकर हरायेगें। विजय हमारी निश्चित होगी कोरोना को मिलकर हरायेगें।
खुद को और मुझे हमेशा के लिये अमर कर दे। खुद को और मुझे हमेशा के लिये अमर कर दे।
आ बैठ जा सब छोड़ के तीरे नदी पर तुम की सबकों यहीं पर आना है दुनियाँ में दोस्तों। आ बैठ जा सब छोड़ के तीरे नदी पर तुम की सबकों यहीं पर आना है दुनियाँ में दोस्तो...