मिल गया मैं
मिल गया मैं
खोजता था मैं जिसे, वो आज मैं मिल ही गया
चाहता था मिलना उससे, वो आज ही मुझ को मिला
खुद का अहं जिसको सभी, है बुरा ही मानते
गर मिल गया वो मुझ में ही फिर, है बुरा क्या आज वो
थी समझ की ये भूल मेरी, और मैं गलत उसको कहूं
वो मुझ में ही था अंश मेरा, मैं ही मेरा अभिमान था
मैं ही मेरा सम्मान था, मैं ही मेरा सब ज्ञान था
मैं से बना था मैं पूरा, और मैं से मैं अंजान था
मैं था बुरा यह जानकर, मेरा मैं बना बेजान था
अब जान पाया हूं ये मैं कि, मैं से ही मैं इंसान था
मैं छोड़ जिसको खोजता था, वो मैं ही मेरा भगवान था
मैं को तलाशो तुम सभी, मैं तुम में है पर तुम नहीं
मैं जो मिला तुमसे तुम्हारा, मैं मिट भी जाएगा तभी
दो मैं मिला के देख लेना, जग दिख ही पाएगा तभी
