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Gulafshan Khan

Inspirational

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Gulafshan Khan

Inspirational

मेरी माँ

मेरी माँ

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हम बच्चे जाने कब बड़े हो जाते हैं,

मां पापा की नजरो से दूर पढ़ने आ जाते हैं।

दोस्तों एक गुज़ारिश है तुमसे...

कि उनका भरोसा खुद से कभी उठने मत देना,

अपनी वजह से उन्हें कभी टूटने मत देना ।

हैं अगर उनकी दुआएं साथ हमारे ,

हर कामयाबी कदम चूमेगी तुम्हारे ।

तन्हाई में उन्हें याद करके , हम सो जाते हैं ,

हम बच्चे जाने कब बड़े हो जाते हैं ।

काश आज मैं मां के पास होती ,

तो उनसे मेरे सारे गम बयां कर देती ।

क्यूंकि ...

एक तू ही है जो मुझे समझेगी ,

मां मेरी हर तकलीफे दूर कर देगी।

काश आज उनके आंचल में हम सो जाते ,

जाने कब हम बच्चे बड़े हो जाते ।

मां मेरी हर गलतियों को माफ कर देती है ,

गलत रास्ते पर जाने से मुझे रोक लेती है।

मां आज तेरी बहुत याद आ रही है ,

मैं आ जाऊं तेरे पास ये तू भी चाह रही है।

मां....

हम क्यू इतने बड़े हो जाते हैं,

की तेरी नज़रों से कहीं दूर चले आते हैं।


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