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Manoj Behera

Abstract

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Manoj Behera

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मेरि वारिपदा सहर

मेरि वारिपदा सहर

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प्यारे सहर बारीपदा ।

में देखता हूं।

उजड़े महल में.....

बारीपदा की स्मृति मीलों मीलों तक फैली हुई है।


विवरण के रूप में अनदेखा किया गया।

यह उपेक्षित शहर का इतिहास है।

 कई अंतहीन इतिहास की पांडुलिपियाँ।

 शाम के समय, अंबिका देवी कि मन्दिर मेँ

 कविता से घिरा होता है।


मुझे सर्दियों में पढाई के लिए साइकिल

की सवारी करने की कहानी याद है 

 जब सुबह ठ्ड मेँ काम्प रहे थे।


ऐतिहासिक रूप से, शहर में एक उच्च संस्कृति और सभ्यता है।

दरअसल दिगालय क्षेत्र के लोग हर इंसान को

देशी वन्य जीवन की उपाधि से भंज माटी से जोड़ते हैं।

फिर भी........फिर भी........


इन सबके बीच, 

सहर अपने पुराने वैभव को थामे हुए चुपचाप खड़ा है।

क्योंकि वह सहर बाद के जीवन को जानता है।


उस शहर के हर आदमी ने दूसरों को देखा और मुस्कुराया -

"और कहा,केसे हो ?

खबर बताओ।

मुहँ फेरलेना 

इस सहर के लोग नहीं जानते।


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