मेरे अश्रु छलावा नहीं !
मेरे अश्रु छलावा नहीं !
मेरे अश्रु छलावा नहीं !
मेरी प्रतीक्षा हैं, तुम्हारे आगमन तक
मेरा मौन मेरा आरम्भ है,
तुम्हारे निष्कर्ष तक आने पर
मेरी स्थिरता मेरा विश्वास है,
तुम्हारे मान जाने तक
मेरे जज्बात सदैव एक से हैं
कहीं भी जाने तक
मेरे अश्रु, मेरा मौन,
मेरी स्थिरता,
मेरे जज़्बात छलावा नहीं हैं
वो प्रेम हैं।

