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Ruba Begum

Abstract

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Ruba Begum

Abstract

मैं

मैं

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हमेशा हँसते रहो,ऐसा कहती हूँ मैं,

तूफान सी लहरें लिए समंदर सी बहती हूँ मैं ।

अपनों से जीतकर भी,हार को सहती हूँ मैं,

आँखो में लाख सपने सजाए,छोटी सी दुनिया में रहती हूँ मैं ।।


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