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Rahul Mohare

Abstract

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Rahul Mohare

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मै शुन्य हूँ

मै शुन्य हूँ

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आकड़ो में, कभी जुड़ जाता हूँ, कभी घट जाता हूँ कीमत, कभी बढ़ा देता हूँ, कभी कम कराता हूँ मै शुन्य हूँ 


किसी की आँखों में हूँ, किसी के ख्वाबों में हूँ ज्यादा गर हो जाऊ कभी, तो फसाद की जड़ हूँ मै शुन्य हूँ 


न आदि हूँ, ना अंत हूँ, धरने वाले की पहचान हूँ कभी बहका हुवा शोर हूँ, कभी निशब्द ठहराव हूँ मै शुन्य हूँ 


कभी ऊर्जा का साधन हूँ, कभी अचेतन गरिमा हूँ कभी ऊँची चढ़ान हूँ, कभी फिसलती ढलान हूँ मै शुन्य हूँ 


मर्म का इलाज हूँ, किसीके कर्म का ध्वनि हूँ किसीकी पहचान हूँ, किसी का अनचाहा दाग हूँ मै शून्य हूँ 


कोई वादा हूँ, किसीका मुकम्मिल मकसद हूँ आबरू हूँ किसीकी, किसीकी ख्वाहिशो में शुमार हूँ मै शून्य हूँ 


बेसबब मुझे पाने की होड़ में दौड़ रहे है सारे मंजिल नहीं, मै तो....., बस एक सफ़र हूँ


अरमान हूँ, फितरत हूँ, हौसला हूँ, न जाने क्या हूँ जो था वजूद से, आज भी वही हूँ, मै शुन्य हूँ  !


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