rkd 20207
Children
हिन्दु मुस्लिम सिख और ईसाई ,
हर धर्म के लोग अनेक भाई ,
मानवता ही धर्म हमारा ,
जिस से बने हैं हम सब एक ,
काले गोरे की भेद नहीं,
हम सब में मतभेद नहीं,
बना हुआ है हम, सब में भाईचारा ,
जग में सुन्दर भारत देश हमारा ।
मानवता
कितनी सुन्दर गाती है चिड़िया टप-टप दाना चुगती है चिड़िया कितनी सुन्दर गाती है चिड़िया टप-टप दाना चुगती है चिड़िया
कभी कुछ हमें मज़बूत बना जाते हैं तो कभी हमारे विश्वास को हिला जाते हैं, कभी कुछ हमें मज़बूत बना जाते हैं तो कभी हमारे विश्वास को हिला जाते हैं,
चूहा बोला दूर रहो बस नहीं हमारा कोई मेल, चूहा बोला दूर रहो बस नहीं हमारा कोई मेल,
मैं तुम्हें सोचता हूं मां जब खाली दोपहर में अकेले ही बोल पड़ता हूं। मैं तुम्हें सोचता हूं मां जब खाली दोपहर में अकेले ही बोल पड़ता हूं।
देवतुल्य पिता हमारे जीवन का आधार हमारे खुशियों के खातिर हमारे। देवतुल्य पिता हमारे जीवन का आधार हमारे खुशियों के खातिर हमारे।
तो पा लेना अब तू मुझे अगले जन्म में ही साकी। तो पा लेना अब तू मुझे अगले जन्म में ही साकी।
भवसागर से पार कर देते हैं भवसागर से पार कर देते हैं
पैरा, घास वह खाती है पौष्टिक दूध देती है. पैरा, घास वह खाती है पौष्टिक दूध देती है.
हाथों में साबुन की बट्टी करते हैं किचकिच सब बच्चे हाथों में साबुन की बट्टी करते हैं किचकिच सब बच्चे
काश वो पल वापस आ जाते, हम भी बचपन में खो जाते। काश वो पल वापस आ जाते, हम भी बचपन में खो जाते।
सोनू, सोनू करके माता पुकारे आ रहा हूँ आ रहा हूँ सोनू ये कहे। सोनू, सोनू करके माता पुकारे आ रहा हूँ आ रहा हूँ सोनू ये कहे।
खूब ग्रीष्म में पीजिए, रहता यही अमूल्य।। खूब ग्रीष्म में पीजिए, रहता यही अमूल्य।।
खोया मैंने सब कुछ अपना जब मां तू खोई..... खोया मैंने सब कुछ अपना जब मां तू खोई.....
हर निवाले पे जो खाते हैं। उनका मेहनत रसीद है।। हर निवाले पे जो खाते हैं। उनका मेहनत रसीद है।।
शत्रुता मिटाकर मित्रता बढ़ाते शत्रुता मिटाकर मित्रता बढ़ाते
गर्मी के संग परीक्षा भी आई बच्चों करो तुम खूब पढ़ाई. गर्मी के संग परीक्षा भी आई बच्चों करो तुम खूब पढ़ाई.
यार कहीं तुम खो मत जाना, मेरा हर दुःख तुमने जाना। यार कहीं तुम खो मत जाना, मेरा हर दुःख तुमने जाना।
बेटी तो सभी फिर भेदभाव क्यों रहता है। सच हां हम सभी बेटियां होती हैं।। बेटी तो सभी फिर भेदभाव क्यों रहता है। सच हां हम सभी बेटियां होती हैं।।
कभी मुकम्मल मिले ही नहीं हम.. तो मुकम्मल बिछड़ना आसान कैसे हो सकता है ? कभी मुकम्मल मिले ही नहीं हम.. तो मुकम्मल बिछड़ना आसान कैसे हो सकता है ?
हम सुकून से बैठ कर सुना करते थे कभी कई परियों की कहानी, हम सुकून से बैठ कर सुना करते थे कभी कई परियों की कहानी,