कोरोना का करूणा
कोरोना का करूणा
मै मौत बनकर आया हूँ
मानव तेरे महफिल मे ,
तहस नहस कर जाउंगा
देखना पल दो पल में।
तुझे औकात का अहंकार बहुत है
वही बताने आया हूँ,
सब समझाकर जाउंगा
यही बीडा़ उठाया हूँ,
भरसक कोशिश करूंगा कायर
कि अब भी तुझे समझ मे आये,
बेजुबान को भी दर्द होता है
उसका अंदाजा हो जाये,
मेरी कोई गलती नहीं है
सब तेरा किया धरा है,
अनियमित जीवनशैली का
अंत यही नतीजा है,
सब नाशवान है इस जहां मे
फिर काहे को डरता है,
जिसका नाश किया तुने
उसपर अब क्या कहता है?
अपने जान पर बन आया तो
हल्ला फसाद करता है,
उसका क्रंदन सुना नही
जो तेरे आगे रोता है ,
रूक अभी अकल आयेगा
जब मेरे आगे गिड़गिड़ायेगा
तब जाकर तेरे मन मे
मानवता जागेगा,
तूझे यहां भेजा गया था
जिसका रक्षा करने,
मौका देखकर तूने ही
लगा उसीको मारने,
खुद धरती का मूल निवासी
उसको माने गैर,
यही समझाने आया हूं मूरख
अब मना ले अपनी खैर,
मेरे अंदर संवेदना है
सिर्फ डराने आया हूं,
तेरे भाषा मे तुझको
हकीकत बताने आया हूं,
चले जाउंगा राह दिखाकर
दिशाहीन हो गया है,
करूण चेतना जागृत करले
जिसे गंवा दिया है,
जैसे ही समझ आयेगा
उसी क्षण विदा हो जाऊंगा
तुझ पर निर्भर है कि
कब तक मुझे भगाएगा।
