STORYMIRROR

Kamlesh Purohit 'Jasmin'

Abstract

2  

Kamlesh Purohit 'Jasmin'

Abstract

कोई मिल जाए

कोई मिल जाए

1 min
88

खामोशी की कतार पे खड़ा हूं मैं।

        जाने कब कोई सुकून मिल जाए।

गुमनाम राहों पे चल रहा हूं मैं।

        जाने कब कोई हमसफ़र मिल जाए।

खोजने लगा हूं औरो मै।

        जाने कब कोई अपना मिल जाए।

तलाशी ले रहा हूं उस आइने की।

        जाने कब कोई तस्वीर मिल जाए।


     



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

More hindi poem from Kamlesh Purohit 'Jasmin'

Similar hindi poem from Abstract