Pratibha Mahi
Abstract
पाँव पड़े हैं कब्र में
मन तो भरे उछाल।
पाने को कमसिन कली
हुये हाल बेहाल।।
तुमको बुला रह...
तू अपना सा लग...
कलाएँ संस्कार...
देखो माटी का ...
सुर-ताल सी मै...
दिवाली हम मना...
माँ बेटे का प...
बहती है गंगा ...
मैं शमा यूँही...
जब मैं बोल भी नहीं पाता था.. सिर्फ़ मेरे इशारों से मैंने उन्हें हर ख्वाहिश पूरा करते दे जब मैं बोल भी नहीं पाता था.. सिर्फ़ मेरे इशारों से मैंने उन्हें हर ख्वाहिश पूर...
पूरी कायनात मुर्दाघर की मानिंद सर्द हो गई है। पूरी कायनात मुर्दाघर की मानिंद सर्द हो गई है।
अपने सतीत्व के लिए अग्नि परीक्षा देती हैं। न जाने कैसी होती हैं ये स्त्रियां ? अपने सतीत्व के लिए अग्नि परीक्षा देती हैं। न जाने कैसी होती हैं ये स्त्र...
काम की ये जिंदगी है अब ना कोई ख्वाहिश ना जुस्तजू है काम की ये जिंदगी है अब ना कोई ख्वाहिश ना जुस्तजू है
सड़कों पर आवाज लगाते बच्चों को करतब करते देखा सड़कों पर आवाज लगाते बच्चों को करतब करते देखा
एकान्तता हो तुम, उस सागर किनारे जैसी, एकान्तता हो तुम, उस सागर किनारे जैसी,
खुद पर बड़ा घमंड करते और फिर पछताते हैं। खुद पर बड़ा घमंड करते और फिर पछताते हैं।
किंतु जो थे स्वाभिमानी स्वतंत्र और समर्थ भी किंतु जो थे स्वाभिमानी स्वतंत्र और समर्थ भी
इससे पहले कि शब्दों की आग जमकर बर्फ़ बन जाए इससे पहले कि शब्दों की आग जमकर बर्फ़ बन जाए
रावण को देखा, फिर शीश झुकाया उसने बड़े प्यार से मुझे उठाया गले लगाया, मेरी पीठ थपथपाया रावण को देखा, फिर शीश झुकाया उसने बड़े प्यार से मुझे उठाया गले लगाया, मेरी ...
बस खाना - डरना और जनना, इतने में ही, इंसान क्यों पड़ा है? बस खाना - डरना और जनना, इतने में ही, इंसान क्यों पड़ा है?
कुदरत ने ऐसा ताना बाना बुना है घर, परिवार की इकाई को जोड़ समाज का रुप दिया है, कुदरत ने ऐसा ताना बाना बुना है घर, परिवार की इकाई को जोड़ समाज का रुप दिया...
तेरा बुत बनू और बंद रहूँ मंदिर के तालों में, तेरा बुत बनू और बंद रहूँ मंदिर के तालों में,
एक सुरीली आवाज, दर्द के तरानों में, हिलोरे लेती, एक सुरीली आवाज, दर्द के तरानों में, हिलोरे लेती,
अपनों की आड़ में अपनों का अपने ही आज खून कर रहे। अपनों की आड़ में अपनों का अपने ही आज खून कर रहे।
प्रभु मूरत देख कर देवता अयोध्या में रहे, ये करें विचार। प्रभु मूरत देख कर देवता अयोध्या में रहे, ये करें विचार।
अठवें दिन मन मा खुशी भइल जब दुइ हजार जेबी मा गइल पूरा बजार हम घूमि आयन पर छुट्टा ओकर अठवें दिन मन मा खुशी भइल जब दुइ हजार जेबी मा गइल पूरा बजार हम घूमि आयन ...
आप उस समुद्र की भाँति हैं जिसे, मैंने समस्त दुखों को अपने भीतर, आप उस समुद्र की भाँति हैं जिसे, मैंने समस्त दुखों को अपने भीतर,
जीवन बदल दिया । शब्द नाद ने ब्रह्मांड को गुंजित कर दिया । जीवन बदल दिया । शब्द नाद ने ब्रह्मांड को गुंजित कर दिया ।
नवल प्रभा में नवल वर्ष का, नवल हर्ष वितरे वसुधा॥ नवल प्रभा में नवल वर्ष का, नवल हर्ष वितरे वसुधा॥