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Sonal Omar

Abstract

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Sonal Omar

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कलयुग की करामात

कलयुग की करामात

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जिस युग में अधर्म चहुँओर व्याप्त है!

ऐसा परिणाम कलयुग की करामात है।।


नहीं सुरक्षित स्त्री मन्दिर, मस्जिद, कोख में

इस्तेमाल होती जो केवल शोषण और भोग में

जहाँ स्त्रियों के लिए जीवन अभिशाप है!

ऐसा परिणाम कलयुग की करामात है।।


जिस युग में इंसानियत हैवानियत हो जाये

रिश्ते नातों में प्रेम व मानवता न रह जाये

जहाँ संस्कार और धर्म को मिलती मात है!

ऐसा परिणाम कलयुग की करामात है।।


प्रभुत्व व सीमा विस्तार के लिए नाश हो,

सरहदों पर बिछती सैनिकों की लाश हो,

जहाँ मानव करता मानव पर आघात है!

ऐसा परिणाम कलयुग की करामात है!!


प्रेम बोलकर जिस्मों का बंधन जुड़ने लगे

जब इंसानियत के साथ रूह भी मरने लगे

जहाँ कसमें-वादे भी देते विश्वासघात है!

ऐसा परिणाम कलयुग की करामात है।।



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