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Shiv Chhatrala

Abstract

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Shiv Chhatrala

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किरदार

किरदार

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ज़िन्दगी के सारे किरदार निभाने के

बाद दुनिया ने नायक मान लिया।

तभी मेने मेरे सारे किरदारों को

गले से लगा लिया।


खुद को अलग दिखाने की दौड़ में

मैंने खुद को खुद से छुपा लिया।

इसिलए मुजे देखने के लिए

नुकीला शीशा भी अब आईना बन गया।


ढूंढता रहा वो आईना

बिचारा मुझे खाली घरों में,

और में उसके सामने खड़ा,

कहीं किरदारों के बीच गायब हो गया।


अब नकाबों की दुकान लगाता हूँ,

रोज़ इस दुनिया के सामने,

और किरदार निभाने में ज़िन्दगी

इतनी कायम करदी मैन,

कि अब तो आईने को भी मुझसे ज़्यादा

मेरा किरदार पसंद आने लगा।


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