इत्तिफ़ाक़
इत्तिफ़ाक़
नींद ने अब आना बंद कर दिया था।
रात ने अपना अंधेरा खुला छोड़ दिया था।
हवा के जोके मेरी नींद उड़ा ले गई और
बस मैंने अब सपने देखना भी बंद कर दिया था।
उस रात का अचानक से गहरा होते जाना
अब शाहजीज़स सा लग रहा था,
लेकिन जैसे ही दिन खुला
वैसे ही एहसास हुआ कि वो एक इत्तिफ़ाक़ था।।
