Shayar Sahab
Fantasy
ना चाह कर भी सब करना पड़ेगा.
मुझको समय के हिसाब से चलना पड़ेगा
बीत गया सर्दियों का मौसम
अब तो बरफ को पिघलना पड़ेगा..
कोइ देखने लगा है रस्ता मेरा
तेरी गलियों से अब निकलना पड़ेगा।
ख्यालात
काँटों की राह में सहिष्णु पथिक यह जादू - सा यजमान काँटों की राह में सहिष्णु पथिक यह जादू - सा यजमान
कार्तिक मास की अमावस्या को, मनाया जाता है रोशनी का यह त्यौहार। कार्तिक मास की अमावस्या को, मनाया जाता है रोशनी का यह त्यौहार।
है प्रकृति की परितोष जन - जन को बांटा है है प्रकृति की परितोष जन - जन को बांटा है
इश्क सही मायने में इम्तहान नहीं लेता इश्क सही मायने में इम्तहान नहीं लेता
जिस दौर से हम तुम गुजरे हैं, वो दौर ज़माना क्या जाने। जिस दौर से हम तुम गुजरे हैं, वो दौर ज़माना क्या जाने।
नजरें मिलाओ नजरंदाज करके भी इश्क जताया जा सकता है नजरें मिलाओ नजरंदाज करके भी इश्क जताया जा सकता है
अगले ही पल सोचता यह गेंदे का खूबसूरत फूल तोड़ने पर गुस्सा हो जाता है अगले ही पल सोचता यह गेंदे का खूबसूरत फूल तोड़ने पर गुस्सा ...
फिर भी मेरी हर इच्छा पूरी करता था, वो अजनबी मेरे राम की तरह था।। फिर भी मेरी हर इच्छा पूरी करता था, वो अजनबी मेरे राम की तरह था।।
सभी को बात ये दिल की, बताया यूं नहीं करते लगी हो चाहे जैसी भी, जताया सभी को बात ये दिल की, बताया यूं नहीं करते लगी हो चाहे जैसी ...
वो भला है क्या जवानी जो नहीं बने कहानी, भले ज़ख़्म हैं पुराने मैंने इल्तियाम देखा। वो भला है क्या जवानी जो नहीं बने कहानी, भले ज़ख़्म हैं पुराने मैंने इल्तियाम ...
गम के पैमानों में खुद को डुबोकर हरि खत्म सा हो गया है। गम के पैमानों में खुद को डुबोकर हरि खत्म सा हो गया है।
ऐ जिंदगी तुझे क्या चाहिए, ज़रा खुलकर बता मुझे. ऐ जिंदगी तुझे क्या चाहिए, ज़रा खुलकर बता मुझे.
जीत के जश्न को अपने जहन से न खोने दिया। जीत के जश्न को अपने जहन से न खोने दिया।
जय जय जय माँ सिद्धिदातृ । तुमसे समापन शुभ नवरात्रि ।। जय जय जय माँ सिद्धिदातृ । तुमसे समापन शुभ नवरात्रि ।।
कहीं दूर बजती बांसुरी फिर धरती सजने का एहसास कराए वो कहीं दूर बजती बांसुरी फिर धरती सजने का एहसास कराए वो
ये ज़मीं ... बिल्कुल शांत ग़ंभीर धैर्य को धारण करती हुई. ये ज़मीं ... बिल्कुल शांत ग़ंभीर धैर्य को धारण करती हुई.
हर चरण में एक छवि लिए, इंदुकला की तरह। हर चरण में एक छवि लिए, इंदुकला की तरह।
उस मन से जब खुद को देखे उथल पुथल अंतर्मन हो। उस मन से जब खुद को देखे उथल पुथल अंतर्मन हो।
रहती निडर हमेशा वह भी, आत्मा ज्ञानी बनती है।। रहती निडर हमेशा वह भी, आत्मा ज्ञानी बनती है।।
चेहरे की शिकन छुपाती हूं, चुन चुन कर पत्ते उठाती हूं। चेहरे की शिकन छुपाती हूं, चुन चुन कर पत्ते उठाती हूं।