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Deepti Gupta

Drama

3  

Deepti Gupta

Drama

ख़ुशी के बीज

ख़ुशी के बीज

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ये जीवन तो है हँसने हँसाने के लिए

ख़ुशी ठूंठती नहीं मैं मुस्कुराने के लिए


 ख़ुद ही ख़ुशियों के बीज़ बोते चली जाती हूँ

कली खिले न खिले, ख़ुश होते चली जाती हूँ


दो-चार ख़ुशी के फल तो मिल गए मुझे भी

बाक़ी छोड़ देती हूँ ज़माने के लिए 

ख़ुशी ढूंढती नहीं मैं मुस्कुराने के लिए।


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