STORYMIRROR

Saurav Bhattacharya

Inspirational

2  

Saurav Bhattacharya

Inspirational

खास और आस

खास और आस

1 min
140

मंजिल ढूंढता राही 

चला जा रहा किस ओर है?

मंजिल की चाह में तू

चल रहा किस ओर है?


बैठ कुछ पल राह में,

मत छटपटा अनजानी चाह में

पूछ खुद से ये प्रश्न,

क्या बल है तेरी इस बाह में?


तू जान ले, तू पहचान ले

कि क्या है तेरा सक्षम हुनर

झांक के अपने अंदर

पायेगा तू उसे, रख सबर


क्या "खास" तुझ में

क्या "आस" तुझ में

कर अलग दोनो को

तू अभी इस पल में


मंजिल तुझे दिख जाएगी,

आसान तेरी राह हो जाएगी

इस "खास" का और

"आस" का अंतर ही

तुझे तेरी मंजिल तक पहुंचाएगी।।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Inspirational