STORYMIRROR

Pawanesh Thakurathi

Abstract

3  

Pawanesh Thakurathi

Abstract

कबीर के ढाई आखर

कबीर के ढाई आखर

1 min
232


घड़ी में ढाई बजे हैं रात के

उजाला फैला है चांदनी का


शतरंज के खेल में 

घोड़े ने ढाई कदम चलकर

मात दे दी है राजा को


सामने टी० वी० के प्रसारण को

गौर से देखो और सुनो

वह लड़की मुस्कुराती हुई कह रही है-


कबीर के ढाई आखरों ने

एक बार फिर से

तोड़ दी हैं सारी दीवारें

और जीत लिया है सारा आकाश। 



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract