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VIGNESH DESAI 'ANIVESH'

Abstract

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VIGNESH DESAI 'ANIVESH'

Abstract

जिंदगी

जिंदगी

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कुछ इस तरह से रुठी हुई है जिंदगी

न तोड़ उसका मिल पाये हमे कहीं

सांसें आती जाती है नब्ज़ सिर्फ चल रही


न कोई उत्साह और ना कोई उमंग है बची

है कोई इस जिद्दी को मनाने वाला कहीं

कुछ इस तरह से रुठी हुई है जिंदगी

       


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