STORYMIRROR

Hanmant Chavan

Abstract

3  

Hanmant Chavan

Abstract

ज़िन्दगी मैंने तुझको खूब जिया

ज़िन्दगी मैंने तुझको खूब जिया

1 min
195

ज़िन्दगी मैंने तुझको खूब जिया

ज़िन्दगी मैंने तुझको खूब जिया

रात अंधेरी आयी तो मैने तुझे, 

चांद तारों में ऐसे सजा दिया

ज़िन्दगी मैंने तुझको खूब जिया 

जब गम के बादल छाए तो,

मैने खुशियों से तुझे खफा किया

ज़िन्दगी मैंने तुझको खूब जिया 

हो खुशी की रुत, या हो गम का मौसम -

हर हाल में तूजको साझा किया

ज़िन्दगी मैंने तुझको खूब जिया 

थे काटो से भरे, मेरे रास्ते 

मैंने हर रास्ते को फतेह कर लिया

ज़िन्दगी मैंने तुझको खूब जिया 


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract