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Kritika Pandey

Abstract

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Kritika Pandey

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इश्क

इश्क

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इश्क एक ही जात में हो जरूरी है क्या

वो राजी हर एक बात पर हो जरूरी है क्या

और हम दिल दे बैठे जिस मौसम में

 वो मौसम पतझड़ का था

 महब्बत बस बरसात में हो जरूरी है क्या?


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